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Showing posts from 2016

अन्याय होते देख मुह फेर लेना असुरों के लक्षण

लेख देशबंधु समाचार पत्र में प्रकाशित किया गया था

जानिए, बैल से संबंधित रहस्यमयी बातें जो कम ही लोग जानते हैं

सम्पूर्ण मानव जाति की उत्त्पत्ति का स्रोत एक ही है और सभी उसी एक में मिल जाएंगे अर्थात हमारा आदि और अंत एक ही है। हम सभी के देव और देवी भी एक ही हैं और कुछ पूजनीय जीव भी जैसे कि सर्प, गाय आदि। गाय और गौवंश में कुछ तो ऐसा है कि जिसने दुनिया की सभी संस्कृतियों में एक प्रतिष्ठित स्थान अर्जित किया है। वर्तमान समय में 'हौली काऊ' को भारतवर्ष से जोड़ा जाता है पर इतिहास के पन्नों से इस गोजातीय देवी की सर्व उपस्थिति  का पता चलता है।
मेसोपोटामिया के निवासी बैल को असाधारण शक्ति और जनन क्षमता का प्रतीक समझ औरोक्स के रूप में उसकी पूजा करते थे। बैल, बेबीलोन देवता एन्न, सिन और मर्दुक का भी चिन्ह था और गाय, देवी ईश्तर की। असीरियन देव निन का भी राज्य चिह्नन मानव - बैल के रूप में था।  प्राचीन बेबीलोन निवासी तथा असीरियन लोगों ने अपने महलों (जिसमें देवताओं का आह्वान करने वाले शिलालेख रखे थे ) की रक्षा करने के लिए,  विशाल पंखों वाले बैलों की प्रतिमाओं का निर्माण किया था। ईरानियों के पास भी उनके महलों की रक्षा के लिए भारी पंखों वाले बैल थे। सेमिटिक कानांइट्स के लिए भी बैल बाल का प्रतीक था और गाय अस्त…

The healing prana - Bringing down fever

The article was published in The Covai Post

THE PROCESS OF PRANAYAM

Yoga is the science of entire creation. Sun, moon, earth, water, sky, fire as well as human body are various aspects of creation, yoga is the sum total of it all. What is the force that powers the various aspects of creation, that makes them function, that is the subject of yoga. When you do yoga under a guru, you start interacting with these various elements and forces and slowly you become one with them. Take for instance the five elements. We know the body is made up of the five elements, yet we cannot see them. As you do higher practices of yoga, you begin to realize all these in your body and understand their basis. Then the elements listen to you and follow you. You are able to interact with them and affect changes in the body using them. The science of yoga unfolds in stages, first through elements, then consciousness and finally, divinity.
Yoga is often mistaken as a healing system of the body. Actually, it is not a healing science, it is the sum total of yam, niyam, asan, pran…

कर्म का विधान क्या है, इसकी महत्ता क्या है? कर्मो का फल कैसे निर्धारित होता है?

लेख देशप्यार समाचार पत्र में प्रकाशित किया गया था।

SURYA NAMASKAR

Sun salutation, the ancient yoga technique is considered to be a complete workout for the body affecting all the five layers from the physical to the etheric. Few of its benefits include improving blood circulation of the body, strengthening the skeletal system, making the body flexible, reducing anxiety, calming the mind, and maintaining health of your skin and hair. After completing the four asans of the SuryaNamaskar that we discussed in the previous article you may now preform the remaining asans as given below. Parvatasana (mountain pose): From the Ashwa Sanchalanasana, gently take right foot behind beside the left foot while exhaling. Simultaneously, raise your hips placing both palms flat on the floor. Bring your head between the arms, so that the body forms a triangle. Keep both arms and leg straight in the final position, with your heels placed firmly on the ground and spine straight.
Ashtanga Namaskara (salute with eight parts or points): With your palms already placed flat on…

Samay toh pehlan budhapa rokan laye sahi sah kriya di lod

ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਕਦੇ ਬਚਪਨ ਤੋਂ ਬਾਲਗ ਅਵਸਥਾ ਤੱਕ ਦੇ ਸਫਰ ਨੂੰ ਗਹੁ ਨਾਲ ਵਾਚਿਆ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਮਾਮਲਿਆ ਵਿੱਚ ਚਮੜੀ ਦੀ ਬਨਾਵਟ ਅਤੇ ਰੰਗ-ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਲਗਾਤਾਰ ਨਿਘਾਰ ਲਾਜ਼ਮੀ ਤੁਹਾਡੇ ਧਿਆਨ ਵਿੱਚ ਆਇਆ ਹੋਵੇਗਾ। ਇੱਕ ਛੋਟੇ ਬਾਲ ਦੀ ਚਮੜੀ ਤੇ ਰੰਗ-ਰੂਪ ਗੁਲਾਬੀ ਭਾਹ ਮਾਰਦਾ ਮਿਲਿਆ ਹੋਵੇਗਾ ਜਦਕਿ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਬਾਲਗ ਭਰ ਜਵਾਨੀ ਵਿੱਚ ਹੀ ਰੋਗਪੂਰਨ ਚਮੜੀ ਤੇ ਭੱਦੇ ਰੰਗ-ਰੂਪ ਵਾਲੇ ਮਿਲੇ ਹੋਣਗੇ। ਇਸ ਦਾ ਕਾਰਨ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਸਰੀਰ ਵਿਕਸਿਤ ਹੋਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕ੍ਰਿਆ ਦੌਰਾਨ ਬਾਹਰੀ ਵਾਤਾਵਰਣ ਦੇ ਅਨੇਕ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਬਣਾਵਟੀ ਅਸਰ ਕਬੂਲਦਾ ਹੈ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਤੋ ਉਹ ਗਰਭ ਅਵਸਥਾ ਦੌਰਾਨ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਸੀ।

ਉਦਾਹਰਣ ਵਜੋਂ ਸਾਹ ਲੈਣ ਦੀ ਸਧਾਰਨ ਕ੍ਰਿਆ ਹੀ ਲੈ ਲਵੋ। ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਇੱਕ ਛੋਟੇ ਬਾਲ ਨੂੰ ਸਾਹ ਲੈਦਿਆਂ ਵੇਖੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀਂ ਸਾਫ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਉਸਦੇ ਪੇਟ ਨੂੰ ਉਪਰ-ਥੱਲੇ ਜਾਂਦਿਆਂ ਵੇਖੋਗੇ। ਸਾਹ ਅੰਦਰ ਖਿੱਚਣ ਵੇਲੇ ਪੇਟ ਫੁੱਲਦਾ ਹੈ ਤੇ ਬਾਹਰ ਛੱਡਣ ਵੇਲੇ ਸੁੰਗੜਦਾ ਹੈ। ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਖੁੱਦ ਦੇ ਸਾਹ ਲੈਣ ਦੇ ਤਰੀਕੇ ਤੇ ਗੌਰ ਕਰੋ ਤਾਂ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਉਮੀਦ ਹੈ ਕਿ ਇਹ ਇੱਕ ਛੋਟੇ ਬਾਲ ਦੇ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲੇ ਉਲਟ ਹੋਵੇਗਾ। ਜੇਕਟ ਪੇਟ ਦੀ ਕੋਈ ਹਰਕਤ ਹੋਵੇ ਵੀ ਤਾਂ ਉਹ ਨਾਮਾਤਰ ਹੀ ਹੋਵੇਗੀ। ਪੇਟ ਰਾਂਹੀ ਸਾਹ ਲੈਣ ਨਾਲ ਅੰਦਰਲੀ ਝਿੱਲੀ ਜਾਂ ਡਾਇਅਫ੍ਰਮ ਦੇ ਉੱਪਰ-ਥੱਲੇ ਹੋਣ ਦੀ ਹਰਕਤ ਵਿੱਚ ਤੇਜ਼ੀ ਆਉਂਦੀ ਹੈ। ਨਾਲ ਹੀ ਫੇਫੜਿਆ ਵਿੱਚ ਵਾਤਾਵਰਨ ‘ਚੋ ਤਾਜ਼ਾ ਵਾਯੂ ਅੰਦਰ ਖਿੱਚਣ ਤੇ ਖਰਚ ਹੋ ਚੁੱ…

Acts of pleasure fasten ageing

Creation exists in opposites. For darkness, there is light. For sound, there is silence. For happiness, there is sorrow. For pleasure, there is the pain.

Every action has an equal and opposite reaction. As one indulges in pleasure, whether food or sex, as an equal and opposite reaction, the body ages.

The spices in food render it tasty, but also corrode the lining of intestines and increase hyperactivity in body, leading to ageing. Sexual indulgence gives immense pleasure, but also leads to the loss of vital fluid called sukra.

In fact, the term coined in Ayurveda for sexual pleasure is ‘sukranash’ or ‘loss of sukra’.

According to Ayurveda, the body is composed of seven dhatus—rasa, rakta, mansa, medas, asthi, majja and sukra. These seven dhatus are connected such that loss of one leads to the loss of those preceding it as well.

So the loss of sukra entails the loss of all other six dhatus as well. The significance of the Vedic practice of brahmacharya lies herein.



Yogi Ashwini’s book '…

Yog di Ananth Shakti

The article was published in Punjab Times, Jalandar on 20/12/2016.

3 women fight against illegal camel trade at Bangladesh border

Three women fight against the illegitimate trading of camel after 61 camels were brought from Rajasthan to Kishanpganj, Bihar.
As many as 61 of the Indian desert camels, which were declared as endangered species by the International Union for Conservation of Nature and Natural Resourse (IUCN), were traded illegally from Rajasthan to Kishanganj in Bihar.

As trafficking of camels is prohibited in the state of Rajasthan, a case has been registered at the Kishanganj police station. Ms Nitasha Jaini, an artist by profession, Ms Anjali Anand, Operations Manager with an education agency and Ms Neeru Gupta, an education professional, have taken up the legal battle for protecting and securing the lives of the endangered species. And these women are backed by Dhyan Foundation, an animal welfare NGO. On December 5, 2016, the women along with the NGO fought the case in court and got release orders for 61 camels to rehabilitate them in a shelter in Rajasthan. However, a stay was put on the release ord…

A yogi never falls sick

The article was published in Hindustan Times on 22/12/2016

सनातन क्रिया – सुंदर, स्वस्थ, तनावमुक्त जीवन के लिए : उज्जयी प्राणायाम

पिछले सप्ताह हमने एक सरल श्वास प्रक्रिया की चर्चा की थी जिससे शरीर के चयापचय को अनुकूल किया जा सकता है तथा शरीर की कोशिकाओं के जीवन काल में वृद्धि कर, अपने शरीर के वृद्ध होने की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता हैं। । योग की प्रारंभिक क्रियाओ का यह पहला तत्कालीन लाभ है । आशा है कि पाठकों ने पिछले लेख में वर्णित उदर-श्वास-क्रिया का अभ्यास किया होगा। योग आपके लिए तभी सार्थक है जब आप उसका नियमित रूप से अभ्यास करें क्योंकि योग अनुभव का विषय है, आपका निजी अनुभव ।

अब हम उदर-श्वास-क्रिया में एक छोटा-सा परिवर्तन करेंगे,
१. अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा कर के बैठें। आँखें बंद कर सारा ध्यान नाभि पर रखते हुए उदर श्वास की क्रिया करते रहें। अपने श्वास को धीमा, गहरा और लम्बा करें ।
२. एक लंबी सांस लें और साँस बाहर छोड़ते समय अपना मुँह खोल राहत की एक सांस छोड़े। यदि आप इस प्रश्वास को जागरूकता के साथ करते है, तो अापको एहसास होगा कि हवाएक हल्की फुफकार के साथ आपके गले के अंदरूनी हिस्सों को छूकर बाहर जाती है ।
३. अब यही प्रक्रिया अपने मुंह को बंद करके दोहराएं । प्रत्यक्ष रूप से नासिका छिद्र को छूए बिना, श्वास को एक…

OM: The Sound of Creation

Ever thought about it…What was there when there was no Creation? Imagine a time when there was no time. Time too was created. After time came OM in the form of Dhwani, sound.
Creation began with the sound of Om. From Om emerged all sounds, which further manifested into the dimension of colours and the five elements. The reverse process—from elements to colours to sounds to the eternal Om, opens doorways to the shaktis of Creation.
The closer a shakti is to Creation, the closer is its sound to the eternal Om.  A Western University recorded the sound of the SUN and found it to be a continuous loop of unending Oms.
“And Sun powers all life on earth. Also, Sun has no religion.”

Now to get an experience of OM you can...
Look up the night sky, fix your gaze at any one point and without shifting your gaze start rotating from right to left. After a while stop, close your eyes and stare at point internally…What was your experience? What you experienced inside you is just an iota of OM. Om, from whi…

जानिए, जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति का साधन

सृष्टि की उत्पत्ति से पहले केवल एक अति सूक्ष्म सर्वव्याप्त चेतना थी। यह चेतना ‘आदि शक्ति’ के रूप में प्रकट हुई और उनके हिरण्यगर्भ से सभी कुछ उत्पन्न हुआ। इस सृष्टि के संचालन के लिए आदि-शक्ति ने स्वयं को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में तथा इस संसार को मूर्त रूप देने के लिए "जड़ प्राण  (वायु, जल , आकाश, पृथ्वी और अग्नि) और चेतन प्राण के रूप में प्रकट किया। ब्रह्माजी ने इसकी संरचना का कार्य भार संभाला, विष्णुजी ने इसके पालन पोषण का और भगवान शिव ने इसके परिवर्तन का। यही ‘प्राण’ विभिन्न आवृतियों के परिकम्पन पर स्थित हो कर इस ब्रह्माण्ड के हर पदार्थ को भिन्न रूप प्रदान करते है। मनुष्य में यह प्राण, सूक्ष्म चक्रों के रूप में ऊर्जा केंद्र निर्मित करते है। प्रत्येक चक्र उस व्यक्ति विशेष की मानसिक, आर्थिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्तर का द्योतक है। 


विष्णु की 'माया' शक्ति द्वारा ही सभी आत्माएं इस सृष्टि के कर्म चक्र से बंधी रहती हैं किन्तु जिन आत्माओं को इस भौतिक संसार की निरर्थकता का अनुभव हो जाता है, वह महादेव अर्धनारेश्वर की कृपा से इस सृष्टि के आवागमन से बाहर हो जाती हैं। मनुष्य…

Video | Asans for strengthening the spine

We have been discussing how to maintain a strong spine with the help of asans. Asans are often misunderstood as an exercise for losing weight. While exercise deals with physical body, asans work on all five layers of body training the being through power of consciousness. Exercises increase metabolism & ageing process in the body, asans slow it down. Sage Patanjali describes asana as ‘sthir sukham asanam’, that is, a posture in which you are comfortable and still. Stillness and slowing down is the key to longevity. 

Sanatan Kriya details the asans to decongest the pranic flow in the sushumna nadi which in turn translates as a strong and youthful spine. Sanatan Kriya, is the essence of yoga sutras, which has been tried and tested by thousands at Dhyan Ashram. So perfect is this science of yog that there is not a single asan which strains the 5th and the 6th vertebrae that otherwise under strain can lead to spinal injuries. On the contrary, injuries to the spine can successfully be c…

जीवन में गौमाता के अभिशाप से बचने के लिए न करें ऐसा कार्य

हमारे पूर्वजों को सृष्टि के नियमों का सम्पूर्ण ज्ञान था। वह गाय के महत्त्व और उसके प्रति दुर्व्यवहार और शोषण के परिणामों से भी भली-भांति परिचित थे। वेदों में भी गाय के महत्व का उल्लेख है। अथर्ववेद में कहा गया है : धेनु सदनाम् रईनाम ( 11.1.34) अर्थात गाय सभी प्रकार की समृद्धियों व उपलब्धियों का स्रोत है।’

गाय ही है जो मनुष्य को दूध और उससे बने उत्पाद प्रदान करती है। उसका गोबर ईंधन और खाद तथा उसका मूत्र औषधि और ऊर्वरक प्रदान करता है। जब बैल भूमि की जुताई करते हैं तो भूमि दीमक मुक्त हो जाती है। जब हम यज्ञ द्वारा दैविक शक्तियों से संपर्क करते हैं तो गाय का घी और उपला ही उपयोग में लाया जाता है। कहा जाता है कि जब गाय ने संत कबीर के ललाट को अपनी जिव्हा से स्पर्श किया था तो उनके भीतर असाधारण काव्य क्षमताएं जागृत हो गई थी।

गाय, समृद्धि और बहुतायत का प्रतीक है, वह सारी सृष्टि के लिए पोषण का स्रोत है, वह जननी है, मां है। गाय का दूध एक पूर्ण आहार है। जिसका अर्थ है उसके दूध में सम्पूर्ण पोषण है। उसके दूध में केवल उत्तम कोलेस्ट्रॉल है और इस बात से भी कोई अनजान नहीं कि गाय अपने प्रश्वास में ऑक्सीजन…

The Solar Secret of Cells

Isn’t it amazing to see that even teenagers today are suffering from premature graying and resorting to lacing their bodies with chemical-based cosmetics in a bid to make their face glow and hair shine? On the other hand, our rishis of yore not only had a great physique but also had glowing complexions, shiny mane and a healthy body till the very end; they did not age. What was it that they did, that was so different? Had they found the fountain of youth? In truth they simply understood the principles that govern the creation. The good news is that they have left this reservoir of gyan on anti-ageing in the form of yogic techniques like the Sanatan Kriya, the practice of which brings a being in harmony with nature.


To understand the process of ageing, we must start from the cell. The body (during its inception) for the first half-an-hour is just one cell; so actually all of us in those 30 minutes are just one cell and then that one cell multiplies forming the whole body. However, that …

Chakra Beej Kriya- Yog Nidra

In this article, we conclude our series on Chakra Beej Asans, where we discussed the Chakra Beej Kriya, a set of asans and dhwanis that taps into the phenomenal power of six major chakras in the body namely, Mooladhar, Swadhishthan, Manipoorak, Anahad, Vishuddhi and Agya chakras. Having successfully completed the asans and mantras for the six major chakras, we move onto relaxing the body with Yog Nidra. It is extremely important to relax the body and various energy points to distribute the energy generated in the process of kriya.
Yognidra: 
For this, lie down in shavasana with your body loose, feet slightly apart and palms on either side of the body, facing skyward. Close your eyes and watch your breath at the tip of the nostrils. With one deep inhalation, take your awareness to the left big toe, then all the toes in your left foot, slowly moving upwards to entire foot, ankle, knee and from here gently move up the entire left leg. Similarly then take your awareness to your right big to…

जीवन में ऐसी स्थिति के उपरांत ही होता है शांति और स्थिरता का अनुभव

संपूर्ण भगवद गीता कर्म सिद्धांत पर आधारित है। यह हमेशा कहा जाता है कि, "हम जैसा बोते हैं, बिलकुल वैसा ही फल पाते हैं"। जब हम जमीन में बीज बोते हैं तो उस बीज का अंकुरण एवं उससे पैदा होने वाले पौधे की गुणवत्ता उस जमीन के उपजाऊपन पर निर्भर करती है। उसी तरह हमारा हर कर्म फिर चाहे वह कितना ही तुच्छ क्यों न हो, उसमें अंकुरण होने की क्षमता होती है और हम पर उससे होने वाले प्रभाव वह कर्म कैसे एवं कहां किया गया है, इस पर निर्भर करता है।
हर कर्म का फल उस कर्म की क्षमता और सूक्ष्मता पर निर्भर करता है और उस घटना एवं इंसान जिसके लिए या जिसके विरुद्ध वह कर्म किया गया हो उनकी क्षमता और सूक्ष्मता पर निर्भर करता है। कर्म की सूक्ष्मता जितनी ज्यादा होती है, उतनी तीव्रता से उस कर्म का फल कर्ता को प्राप्त होता है। उदाहरण के तौर पर यह सलाह हमेशा दी जाती है कि हमें किसी भी आध्यात्मिक रूप से प्रगत व्यक्ति के प्रति विचार, वाणी या आचार में नकारात्मकता नहीं रखनी चाहिए। यह इसलिए नहीं कहा जाता चूंकि ऐसे व्यक्ति अत्यंत अहंकारी होते हैं अपितु इसलिए कहा जाता है क्योंकि आध्यात्मिक रूप से प्रगत व्यक्ति की ऊर…

Good Eye Sight

Yogiji article in Andhra prabha kriya for good eye sight

जल नेति द्वारा ज़ुखाम को दूर रखें : योगी अश्विनीजी

आज के समय में बाह्य आकृति को ही सर्वोच्च माना जाता है, इसलिए हर कोई आकर्षक शरीर, चमकती हुई त्वचा एवं सौन्दर्य की चाहत रखता है| परिणाम स्वरूप जहाँ एक ओर मल्टीनेशनल कंपनियों की वृद्धि हो रही है, वहीँ दूसरी ओर उनके द्वारा उत्पादित “फैड डाइट”, हानिकारक रसायनों से भरे कॉस्मेटिक्स व अन्य विषैले पदार्थों के  सेवन से मानव स्वास्थ्य व आयु में गिरावट आ रही है । ‘सनातन क्रिया – एजलेस डाइमेंशन’ पुस्तक में ऐसे रसायनों का विस्तार से विवरण किया गया है, जिनका हम प्रतिदिन उपयोग की जानेवाली वस्तुओं एवं प्रसाधनों  द्वारा सेवन करते हैं  तथा इनके द्वारा  शरीर पर होनेवाले दुष्प्रभाव और इनसे बचने के मार्ग का भी उल्लेख है|
आज के समय में ये अत्यंत आवश्यक है की  हम अपनी  जीवन शैली में  नियमित रूप से शरीर का बाह्य एवं आंतरिक शुद्धिकरण करने वाली प्रक्रियाओं को सम्मिलित करें, जिससे शरीर स्वस्थ तथा रोग मुक्त रहे |पाठकों के लाभ हेतु यहाँ मैं एक ऐसी ही परखी हुई प्रक्षालन प्रक्रिया का उल्लेख कर रहा हूँ , ‘जल नेति’| जल नेति प्राचीन वैदिक प्रक्रिया है, जिसे हमारे ऋषियों ने हजारों वर्ष पूर्व दिया था,  जो अब पाश्चात देश…