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Showing posts with the label gyan. yogi ashwini

योग द्वारा सूक्ष्म इन्द्रियों की जागृति

आज के समय में सूक्ष्म शक्तियों के अनुभव का वादा देने वाली तरह-तरह की कलाएँ बाज़ार में देखने को मिलती हैं और ऐसी संस्थाओं की तो बहुतायत है जो योग के नाम पर क्या कुछ बेचती हुई मिलेंगी जो कि एक मनुष्य को जन्म-जन्मान्तर तक भ्रमित करने के लिए पर्याप्त हैं  I एक बार मैंने किसी अख़बार के लेख में पढ़ा कि पवन झंकार को दरवाज़े की एक तरफ न लटकाकर , बीचों बीच टाँगना चाहिए, इस प्रकार की बातें सभी तर्कों को पीछे छोड़ देती हैं। लोगों के मन में जो आता है ,  बिना सोचे समझे उसे कह जाते हैं ,  लेकिन कहने के पीछे उनका एक उद्देश्य अवश्य होता है  -  कि कही हुई बातों में कुछ नयापन लगे ,  कुछ अलग दिखे ,  क्योंकि नई चीज़ ही तो शीघ्र   बिकती है। इस प्रकार की ख़रीद - बेच  यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि वास्तव में योग तथा अन्य आध्यात्मिक विज्ञान क्या माया से बाहर निकलने का मार्ग हैं या माया के बंधनों में बंधने का ? योग का  व्यावसायीकरण लोग   बिना यह जाने कि उन्हें कहाँ जाना है और उन्हें क्या चाहिए ,  योग के मार्ग पर चल पड़ते हैं और उनमे...

आसन शृंखला: प्रारंभिक – ३ योगी अश्विनी : निहित प्रारंभिक आसनों की चर्

आसनों की इस श्रृंखला में हम सनातन क्रिया में निहित प्रारंभिक आसनों की चर्चा करते रहे हैं| इन आसनों का नियमित रूप से अभ्यास करनेवाले को तेजस्वी, स्वस्थ शरीर एवं आकर्षक व्यक्तित्व प्राप्त होता है| चूँकि ये आसन प्राणमाया कोश के स्तर पर कार्य करते हैं, जो कि सनातन क्रिया के नियमित अभ्यास द्वारा उच्चतम श्रेणी प्राप्त होने पर साधक को विभिन्न रंगों के रुप में दिखता है, ये आसन रोग को शरीर में व्यक्त होने ही नहीं देते| अब तक हमने टखने और घुटने के जोड़ों में प्राण के संतुलित प्रवाह हेतु कुछ आसनों पर चर्चा की| अब हम जांघ के जोड़ों के आसनों पर चर्चा करेंगे| अपने पैर सीधे फैलाकर बैठें| अपनी पीठ सीधी रखें और आपने दोनों पैरों और एड़ियों को जोड़ें| अपनी हथेलियों को ज़मीन पर कूल्हों के समीप इस तरह रखें, जिसमें आपके हाथों की अंगुलियाँ आपके शरीर से विपरीत दिशा में हों  | अब अपने दाहिने पैर को सीधे रखते हुए, बाएं पैर को मोड़कर उसके टखने को दाहिने पैर की जांघ पर रखें| अपने दाहिने हाथ से अपने बाएं टखने को सहारा दें और अपना बायां हाथ अपने बाएं घुटने पर रखें| फिर श्वास को अंदर लेते हुए अपने...

गुरु की महिमा अपरम्पार

Yogi ji's asrticle was published in virat vaibhav newspaper.

प्राण सृष्टि का सार : योगी अश्विनी

This article was published in Punjab kesari by Yogi Ashwini ji

Yogic practices for a beautiful, healthy life : UJJAI PRANAYAMA

Anti-ageing: Breathe it right

ANTI-AGEING | BREATHE IT RIGHT By: Yogi Ashwini If you trace a person from being an infant to a full grown adult, you will notice, in most cases, a progressive decline in the skin texture and complexion. A baby is glowing pink whereas most adults, even in their prime youth, are plagued with a diseased skin and dull complexion.  This is because, in the process of growing up, one is exposed to certain unnatural practices and stimuli from which it was kept protected in the womb. Take for example, the simple act of breathing. If you observe a baby breathing, you would notice a pronounced abdominal movement. The stomach inflates as it breathes in and deflates as it breathes out. If you observe your own breathing patterns, most likely, you will find it to be the opposite and with little or no abdominal movement…this breathing pattern of yours, holds the key to the way you look and your present state of health. Abdominal breathing maximizes the up and down movemen...

मानव शरीर में तेज़ और आकर्षण उत्त्पन करने की असीम शमता

This article was published in Deshpyar newspaper, Panchkula

योग में नियम का महत्व

वर्ष का प्रत्येक दिन एक विशेष शक्ति द्वारा संचालित होता है। यदि किसी साधक की साधना या अभ्यास एक दिन के लिए भी छूटता है तो वह उस दिन की शक्ति से वंचित रह जाता है  और उस कारण पूरे वर्ष की साधना प्रभावित होती है क्योंकि ब्रह्माण्ड में यदि एक भी वस्तु या पदार्थ अपनी व्यवस्था के दायरे में न हो तो उसका प्रभाव सृष्टि के प्रत्येक अंग पर दिखाई देता है – हमारा शरीर, पृथ्वी  अन्य गृह, तारा मंडल आदि सभी पर। यही कारण है कि योग में नियम तथा दैनिक अभ्यास पर ज़ोर दिया जाता है। प्रत्येक शक्ति का एक दिन निर्धारित है। तंत्र और योग में कोई आडंबर या कोई कर्मकाण्ड विधि नहीं होती है केवल शक्ति की साधना की जाती है। दिन की तरह शक्ति के प्रत्येक स्वरुप का एक नाम भी है, किन्तु उनके नाम लेने से पूर्व कुछ विशेष साधनाओं द्वारा शरीर में उनको धारण करने की क्षमता उत्पन्न की जाती है।  गुरु के सानिध्य में ध्यान करते समय साधकों को आरम्भ में सूर्य, चन्द्र आदि शक्तियों के कुछ सूक्ष्म अनुभव हो जाते हैं। लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा है कि यह शक्तियाँ  कहाँ से आती हैं और इनका क्या तातपर्य है ? ध्यान आ...

इस भौतिक सृष्टि का एक सुन्दर सफर है योग

Yogi ji's article in Sarita Pravah , Lucknow

YOGA-The Ultimate Frontier

Today, June 21st, is the longest day of the year in the Northern hemisphere and today is also International Yoga Day. Honorable Prime Minister Modi had suggested June 21st to be declared as International Yoga Day and it is no coincidence that this date was proposed. Apart from being the longest day, it has spiritual significance as well. The summer solstice marks the transition to  Dakshinayana  (  Dakshinayana  is the period when Sun travels back from North to South) and the first Yogi, Lord Shiva is believed to have begun imparting the knowledge of yoga to mankind. On December 11, 2014, the United Nations General Assembly declared June 21st as the International Day of Yoga after Honorable Prime Minister Modi’s recommendation and proposal during his address in the General Assembly in September, 2014. He said  "Yoga is an invaluable gift of India’s ancient tradition. It embodies unity of mind and body; thought and action; restraint and fulfillment; h...

योग ही संपूर्ण विज्ञान

योग संपूर्ण विज्ञान है जिसका सरोकार सृष्टि के भौतिक अथवा व्यक्त और सुक्ष्म अथवा अव्यक्त, सभी पहलुओं से है। मनुष्य श्रृष्टि के व्यक्त और अव्यक्त पहलुओं का भाग बन जाता है। अव्यक्त से ही व्यक्त जगत की उत्पत्ति होती है और ये दोनों पहलू इसी संयुक्त संपूर्ण सृष्टी के ही भाग हैं। योग की सभी सिद्धियाँ एवं अनुभव और योग सूत्रों में दिया गया ज्ञान यथार्थ है जिसका सफलतापूर्ण प्रयोग कई हजारों वर्षों से होता आ रहा है मैंने इस लेख के साथ ध्यान आश्रम के साधकों द्वारा किये गए हवनों में होने वाले दिव्य दर्शन के वास्तविक छाया चित्र देखें हैं। आदरणीय प्रधानमंत्री के प्रयास से इस अभूतपूर्व विज्ञान को विश्वभर में सराहा जा रहा है। आवश्यकता है वैदिक ऋषियों की इस धरोहर को गुरु सानिध्य में असल रूप में अभ्यास में लाने काद्य आइये, अब हम मानव शरीर के उपचार एवं स्वास्थ्य के कुछ बुनियादी पहलुओं पर विचार करते हैं। वैदिक विज्ञान की शक्ति और प्रभाव के मूलभूत अनुभव लेने के लिए एवं उनके शरीर पर होने वाले परिणाम को देखने के लिए आप सनातन क्रिया का अभ्यास शुरू कर सकते हैं, जो अत्यंत सुगम है और जिसका सहजता से आधुनिक जीवन...

प्राणी कर्मो से भाग नहीं सकता

      Yogi Ji's article in Hindi milap Newspaper

GYAN, THAT LIBERATES

Creation has been on for millions of years and souls have been taking birth in the body regularly. If we scientifically look at the basis of soul, then science says energy can neither be created nor destroyed, it only changes form and body is not just elements, it is also consciousness. So obviously if we believe in modern science, then we must also believe in consciousness…At dhyan ashram, practitioners have reported seeing their past lives and many such past life accounts have been recorded in detail. Soul exists in different homes and different bodies. Present souls have taken birth in n number of bodies. If you look outside the window of a plane, no matter where you are in the world, you will find hundreds of buildings and skyscrapers as the plane takes off. As it goes higher, the buildings and skyscrapers becomes smaller and smaller, and slowly they turn into millions of lights which are actually homes of people. So it is interesting that when you access deeper stages of...

IMPORTANCE OF GURU

Article by Yogi Ashwini Ji in Prahar Marathi newspaper on 18th may 2016

गऊ पालन व सेवा से समृद्धि आती है

       Article by Yogi Ashwini ji in Pryaksh Bharat.

जो लोग गौमाँस का सेवन करते हैं ’ सडन डैथ सिन्ड्रोम ‘ से ग्रस्त होते हैं

योगी अश्विनी जी  हमारे पूर्वजों को सृष्टि के नियमों का सम्पूर्ण ज्ञान था। वह गाय के महत्त्व और उसके प्रति दुर्व्यवहार और शोषण के परिणामों से भी भली - भांति परिचित थे। वेदों में भी गाय के महत्व का उल्लेख है।  अथर्ववेद में कहा गया है  : धेनु सदनाम् रईनाम ( ११  . १  . ३४ ) अर्थात गाय सभी प्रकार की समृद्धियों व् उपलब्धियों का स्रोत है।’ यह गाय ही है जो मनुष्य को दूध और उससे बने उत्पाद प्रदान करती है।  उसका गोबर ईंधन और खाद तथा उसका मूत्र, औषधि और ऊर्वरक प्रदान करता है। जब बैल भूमि की जुताई करते हैं तो भूमि दीमक मुक्त हो जाती है, जब हम यज्ञ द्वारा दैविक शक्तियों से संपर्क करते हैं तो गाय का घी और उपला ही उपयोग में लाया जाता है। कहा जाता है कि जब गाय ने संत कबीर के ललाट को अपनी जिव्हा से स्पर्श किया था, तो उनके भीतर असाधारण काव्य क्षमताएँ जागृत हो गईं थीं। गाय, समृद्धि और बहुतायत का प्रतीक है, वह सारी सृष्टि के लिए पोषण का स्रोत है, वह जननी है, माँ है। गाय का दूध एक पूर्ण आहार है, जिसका अर्थ है उसके दूध में सम्पूर्ण पोषण है। उसके दूध में  केवल उत्तम ...

योग एक परिपूर्ण व सर्वश्रेष्ठ विज्ञान

Yogi Ashwini artcle in #Lokasha Marathi paper.

शिव तत्व का अनुभव करना चाहते हैं या दर्शन

यह सृष्टि 16 तत्वों से निर्मित है। पहले पांच तत्व, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश, पृथ्वी लोक से संबंधित हैं। छठा तत्व ‘शिव तत्व’ है जिसका संबंध आज्ञा चक्र से है तथा वह माथे के केंद्र में स्थित है। विशुद्धि और आज्ञा चक्र के बीच में 11 तत्व हैं किंतु फिर भी शिव तत्व को छठा तत्व कहा जाता है क्योंकि शिव आदि, अनादि, अनंत, अखण्ड हैं जो बुद्धि की समझ से परे हैं। सारे तत्व उसी में निहित हैं।  एक सामान्य मनुष्य का मस्तिष्क 7 से 8 प्रतिशत की क्षमता पर कार्य करता है जो कि भौतिक दुनिया के अनुभवों के लिए पर्याप्त है किंतु शिव तत्व का अनुभव करने के लिए उच्च इंद्रियों की जागृति आवश्यक है। शरीर में तीन प्रकार की ग्रन्थियां होती हैं, ब्रह्म ग्रंथि, विष्णु ग्रंथि तथा रूद्र ग्रंथि। ब्रह्म ग्रंथि तथा विष्णु ग्रंथि खोलना अपेक्षाकृत सरल है किन्तु रूद्र ग्रंथि को खोलना बहुत कठिन है।  इसके खुले बिना शेष 11 तत्वों का अनुभव नहीं हो सकता।  16 तत्वों के अनुभव के बाद ही शिव और शक्ति का संयोजन होता है और शिव तत्व की प्राप्ति होती है। शिव तत्व का उद्देश्य केवल मोक्ष है और शिव दर्श...

गौमाता का अभिशाप

The article was published in Hindi Milap newspaper on 5th May 2016

योग की वास्तविकता

yogi Ji's article in uttam hindu newspaper on 5th May 2016