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खुशहाल जीवन के लिए करें इस भावना का त्याग, होगी सुख की प्राप्ति

सृष्टि की किसी भी वस्तु का अधिक मात्रा में उपभोग करना अनुचित होता है और इस  तथ्य के बावजूद हमें इस सृष्टि से ऊपर उठने के लिए सृष्टि की सारी वस्तुओं का उपभोग  करने की आवश्यकता होती है। सृष्टि ने हर व्यक्ति को अपना जीवन सही तरीके से जीने हेतु और उसकी सारी जरूरतों को पूरा करने हेतु उसे कई सारे साधन प्रदान किए हैं। यहां हमें इस तथ्य को समझना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है कि इंसान की जरूरतें सीमित  होती हैं किन्तु उसकी इच्छाएं असीम होती हैं। मायाजाल की उपज इंसान की जरूरतों  से नहीं अपितु उसकी इच्छाओं से होती है। अगर जाल में फंसा कोई कीटक खुद के शरीर को जोर से हिलाने लगे तो वह कीटक उस जाल में अधिक उलझकर रह जाता है और फंस जाता है। मायाजाल का बिलकुल  यही कार्य होता है। इंसान की इच्छाओं का कोई अंत नहीं होता। आपकी इच्छाएं जितनी तीव्र होती हैं उतनी ही तीव्रता से आप आपके इन्द्रियों के प्रति आसक्ति रखते हैं। जितनी तीव्रता से आप अपने इन्द्रियों के प्रति आसक्ति रखते हैं आपकी भौतिक संपत्ति एवं भौतिक विशेषताएं उतनी तेजी से नश्वरता की ओर बढ़ती जाती हैं। जब हम रेत को हमारी मुट्ठी मे...

Sukarmon duara aayegi kushali

BY YOGI ASHWINIJI IN HINDI MILAP 11 SEPT 2014 http://www.webmilap.com/ PUBLICATIONS/ DAILYHINDIMILAP/DAILYHINDI/ 2014/09/11/ArticleHtmls/ 11092014013008.shtml?Mode=1 #