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Showing posts from April, 2016

गुरु का महत्व

माया के सात द्वार और शान्मुखी मुद्रा

           Yogi ji's article in a Hindi newspaper, Milap 

ABOUT DHYAN FOUNDATION

To know more about Dhyan Foundation, visit: http://www.dhyanfoundation.com/

योग की वास्तविकता

CHOOSE YOUR SADHNA PATH

The purpose of creation is experience, each one of us has taken birth because of desire for a specific experience. Depending on that desire, guru carves out the path of sadhna for you and gives you the mantra to invoke the shakti or dev which is responsible for it. Sadhaks may be put into three broad categories—Brahma sadhaks, Vishnu sadhaks and Shiv sadhaks. It is the path they walk that differentiates one sadhak from the other, and no path is higher or lower than the other. The path of Brahm is that of aiding Lord Brahma in the process of creation. That of Vishnu sadhaks is to assist Lord Vishnu in the preservation and maintenance of creation. And, the Shiv sadhaks tread the path of Lord Shiv, the journey back." Yogi Ashwini Lord Brahma gave birth to physical creation. The task of ensuring its smooth functioning was entrusted upon Lord Vishnu and Lord Shiv paved the path of the journey back. The purpose of creation is experience, each one of us has taken birth because of de...

ज्ञान के प्रतीक - श्री हनुमान

अतुलित बल के प्रतीक हैं हनुमान

पृथ्वी की भाँति ही मानव शरीर भी स्थूल और सूक्ष्म की अनेक परतों में विद्यमान है, लेकिन कुछ परतों का अनुभव पाँच इंद्रियों द्वारा किया जा सकता है और कुछ का नहीं, जिन परतों का हम अनुभव कर सकते हैं वही हमारे लिये सत्य हैं और बाकी असत्य। ध्यान की अवस्था में, प्राचीन ऋषियों को मनुष्य के संपूर्ण अस्तित्व का बोध हुआ था। उनके अनुसार, मानव शरीर पाँच परतों में मौजूद हैं, जिसकी एक परत, हमारा स्थूल शरीर है जिसे अन्नमय कोष भी कहते हैं, उसके परे हमारा शरीर सूक्ष्म परतों में भी विभाजित है। स्थूल शरीर के बाद हमारी प्राणिक परत (प्राणमयकोश) होती है, जिसे एक दिव्यदृष्टा विभिन्न रंगों, चक्रों और नड़ियों के रूप में देख सकता है। इसके बाद मनोमय कोश है, जहाँ से मनस या बुद्धि कार्य करती है। मनोमय कोष के बाद विज्ञानमय कोश होता है जो पूर्वानुमान का स्तर है, जो कि अन्तर्ज्ञान से युक्त मन का स्थान है और अंतिम परत आनंदमय कोश है जो हमें परमात्मा से जोड़ने वाली कड़ी है। यहां मांग कर नहीं चिट्ठी लिखकर मांगी जाती है मुराद, पूरी होती है मनोकामना तर्क, सहज ज्ञान और परमात्मा को समझने नहीं देता कुछ भी दे...

ज्ञान के प्रतीक श्री हनुमान

HANUMAN JAYANTI

The article was published in DeshPyaar Newspaper, Panchkula

माया के सात द्वार और शान्मुखी मुद्रा

शान्मुखी मुद्रा के द्वारा करें अद्भुत शांति का अनुभव क्या आप परेशान हैं ? अधिकाँश लोग यह सुनकर हाँ कहेंगे। हमारी इच्छाएँ हमें हर पल उलझा कर रखती हैं। यही परेशानियां और उलझनें मानव को तीव्रता से बुढ़ापे की ओर ले जाती हैं। सनातन क्रिया में हमारी इच्छाओं पर नियंत्रण करने हेतु एक विधि दी है, जिससे न केवल मन शांत होता है, अपितु गुरु सानिध्य में किये जाने पर सूक्ष्म जगत के अनुभव भी होते हैं। किसी न किसी इच्छापूर्ति के लिए, हर समय हमारी कोई एक इंद्रिय सक्रिय रहती है। मानव शरीर में इन इच्छाओं के द्वार हैं हमारी इन्द्रियाँ। शान्मुखी मुद्रा, इन्हीं द्वारों को बंद करके, भीतर की वास्तविक दुनिया के अनुभव देती है। अपनी पीठ बिलकुल सीधी रखते हुए सिद्धासन में बैठ जाएँ। धीरे से अपनी कोहनियों को कन्धों के स्तर पर रखते हुए , अपने हाथों को चेहरे के सामने लाएँ। अपने अँगूठों से दोनों कानों को बंद करें और तर्जनी से दोनों आँखों को। बीच की ऊँगली से नासिका मार्ग दबाएँ और अन्तराल पर साँस भरते रहें। मुँह बंद करने के लिए अनामिका और छोटी ऊँगली का उपयोग करें। सभी बाह्य द्वारों को बंद करने के बाद भीतर की ध...

हनुमान जी की शक्तियों को कुछ विशेष मंत्रों के जाप से जगाया जाता है, जानें कैसे

शास्त्रों के अनुसार हनुमान की शक्ति कलियुग में भी पृथ्वी लोक पर मौजूद है। उनकी सूक्ष्म शक्ति का अनुभव ध्यान आश्रम के कुछ साधकों ने भी किया है और वह शक्ति किस स्थान पर है , उससे भी वह भली - भांति परिचित हैं । हनुमान जयंती के इस पावन अवसर पर हम उनकी दिव्य शक्ति को थोड़ा और समझने का प्रयास करते हैं। भगवान राम के अति प्रिय भक्त , श्री हनुमान , महादेव शिव का ही ‘ रूद्र ’ स्वरुप हैं। वह अतुलित बल के प्रतीक हैं , जिन्होंने   अकेले ही जीवन दान देने वाले संजीवनी पहाड़ को उठा लिया था और अकेले ही रावण की लंका में आग लगा दी थी। शास्त्रों के अनुसार हनुमान की शक्ति कलियुग में भी पृथ्वी लोक पर मौजूद है। उनकी सूक्ष्म शक्ति का अनुभव ध्यान आश्रम के कुछ साधकों ने भी किया है और वह शक्ति किस स्थान पर है , उससे भी वह भली - भांति परिचित हैं । ध्वनि के स्तर पर , श्री हनुमान की शक्ति का संचालन गुरु सानिध्य में , ‘ रूद्र रूद्र महारुद्र मंत्र...

SIMIANS CULLING INHUMANS : NGO's

योगिक क्रियाओं से पाए ज्ञान

Yogi ji's article in Rajasthan Patrika on 17th April 2016

THE CYCLE OF CREATION

Creation is an unending cycle. It has no beginning or end. It’s a continuous process which is divided into mahayugs, which are further subdivided into yugs — Sat, Treta, Dwapar and Kali. Each yug has its traits by which it is defined and a specific level of existence, which it holds in its folds. The beings that inhabit each yug vibrate at a specific pranic frequency. This frequency determines their qualities, nature and forms. Satyug is the time when dharma is at its peak. As a result, environment is healthy, natural resources abound, there is little corruption and treachery. The frequencies are extremely subtle. The time is conducive to subtlest frequencies manifesting in physical body. Health and lifespan of men is at its peak. The exit route for Satyug is direct gyan in the sanidhya of guru . Treta yug is marked by dharma losing its one leg. The environment deteriorates and crimes increase. The frequencies are less subtle as are men and their bodies. In this yug, it is not...

असंतुलन से संतुलन की ओर बढ़ने का समय

                            Yogi Ji's article in Hindi milap on 14th April 2016

राम नवमी

Yogi Ji's article in Deshpyar newspaper, Panchkula on 14th April 2016

राम का नाम, दुनिया भर में शुभ माना गया है (shiraz-e-hind, shaunpur)

राम का नाम, दुनिया भर में शुभ माना गया है राम नवमी 'राम' शब्द केवल भारतीय उपमहाद्वीप तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर की सँस्कृतियों में इस शब्द का किसी न किसी रूप में उल्लेख है। उदाहरण के तौर पर, स्कैंडिनेवियाई देशों में सबसे अधिक बिकने वाला पानी 'राम-लूसा' के नाम से बिकता है। मुसलमानों का पाक महीना भी 'रमजान' कहा जाता है। हेज़रों का बेटा, जो कि डेविड का एक पूर्वज था, 'राम' के नाम से जाना जाता था। इजराइल के राज्य में भी 'जय-हो-राम' नामक राजा ने राज किया था। बाइबिल में भी कम से कम तीन- चार जगहों पर 'राम' शब्द का जिक्र है तथा और भी कई स्थानों, जैसे बेंजामिन, बेथल, आशेर तथा नपताली में भी इस शब्द उल्लेख है। अभी भी 'राम-नगर' के नाम से जेरुस्ल्म में एक शहर मौजूद है। हिब्रू में 'राम' का अर्थ है 'उच्च या महान' जो कि, शक्ति और सत्ता का प्रतीक है तथा अक्सर इसका प्रयोग किसी नेता या मुखिया के लिए किया जाता है। इन उदाहरणों से तो यही प्रतीत होता है कि राम का नाम, दुनिया भर में शुभ माना गया है। चैत्र मास के शुक्ल पक...

भारत तक सीमित नहीं है राम नाम, विदेशों में भी पूजे जाते हैं लेकिन एक अलग रूप में

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी 'राम नवमी' के नाम से जानी जाती है। 'राम' इस सृष्टि में एक सकारात्मक दैविक शक्ति के प्रतिरूप हैं, जिन्होंने संपूर्ण सृष्टि में संतुलन की पुनः स्थापना के लिए जन्म लिया था।  इस दिन नक्षत्रों एवं ग्रहों की स्थिति ही कुछ ऐसी थी कि एक असाधारण दैविक शक्ति ‘राम’ के रूप में मानव शरीर धारण कर सके। प्रत्येक वर्ष का यह दिन राम शक्ति से ओत-प्रोत होता है जो इस दिन की ऊर्जा को बहुत शक्तिशाली बनाता है। गुरु सानिध्य में साधक, सुगमता से इस दिन की असाधारण शक्ति को प्राप्त कर उसे अपनी आत्मिक उन्नति और परोपकारी कार्यों में लगाते हैं। 'राम' शब्द केवल भारतीय उपमहाद्वीप तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर की संस्कृतियों में इस शब्द का किसी न किसी रूप में उल्लेख है। उदाहरण के तौर पर, स्कैंडिनेवियाई देशों में सबसे अधिक बिकने वाला पानी 'राम-लूसा' के नाम से बिकता है।  मुसलमानों का पाक महीना भी 'रामदान' कहा जाता है। हेज़रों का बेटा, जो कि डेविड का एक पूर्वज था, 'राम' के नाम से जाना जाता था। इजराइल के राज्य में भी 'जय-हो-र...

शक्तिशाली तरीके से करें राम नाम का जाप, स्वयं अनुभव करेंगे चमत्कारी प्रभाव

इस दिन की शक्ति को प्राप्त करने के लिए, एक सरल सी क्रिया है, 'राम' का जाप।  इसका आरम्भ करने से पहले, श्रद्धा पूर्वक गुरु-वंदना करें और वज्र आसन में बैठ जाएं। आंखें बंद करके, नाक के सिरे पर ध्यान केंद्रित करें और अपने श्वास की लयबद्द क्रिया पर ध्यान देते हुए कुछ समय तक प्रत्येक सांस को श्वास प्रक्रिया के साथ गहरा और लम्बा करते जाएं। फिर धीरे से एक गहरी लम्बी सांस के साथ अपना ध्यान अपनी नाभि के मध्य, मणिपूरक चक्र पर रखते हुए 'राम’का जाप शुरू करें। नाभि से शक्ति महसूस करते हुए, कुछ समय तक जाप को उच्च स्वर में जारी रखें फिर धीरे- धीरे उसका उच्चारण मंद और गहरा करते हुए  धीरे-धीरे होठों पर ले आएं। अंत में मौन होकर, आंतरिक रूप से जाप जारी रखें। पूरे अभ्यास के समय आंखें बंद रखते हुए अपना ध्यान गुरु पर केंद्रित रखें।     यह एक बहुत ही शक्तिशाली जाप है जो शरीर में अत्यधिक ऊर्जा या गर्मी उत्पन्न कर सकता है। जाप पूर्ण होने पर उससे उत्पन्न  ऊर्जा को, स्वयं की चेतना शक्ति से, अपने शरीर के प्रत्येक अंग और कोशिका में ले जाएं और किसी भी प्रकार के असंतुलन को दूर करें।...

YOGA, NOT BHOGA.. IS THE FINAL FRONTIER

"Yoga, Not Bhoga, Is The Final Frontier" by  Yogi Ashwini  in  The Times of India  ,  Speaking Tree  column, 30th March 2016

KICK THE BEER, HIT THE TRANCE - News9

Neuroscientists, doctors , Corporate Honchos all vouch for the benefits of ‪#‎ Meditation‬ But what is Meditation and how it is different from  ‪#‎ Dhyan‬ , as given by Rishi Patanjali in Yogasutras, what effect it has on the mind and body... Yogi Ashwini ji explains in a panel discussion on  ‪#‎ News9‬ A Must Watch ! 'Kick the Beer, Hit the Trance' #News9 You own a car, you own a house, you own a brain. its an instrument for you to work on., says the neurologist From affecting cancer patient to increasing everyday productivity – doctors agree to the positive effects of 'meditation'. A neurologist and an oncologist discuss the relationship between mind and body and brain and mind… and the mysteries that medical science is still trying to figure out... but those were deciphered by the Vedic seers thousands of years ago ! Yogi Ashwini  on different types of meditations... "Dont confuse dhyan with meditation of different kinds... L...